Dr

Add To collaction

पत्थर पूज रहा हूँ मै भी

पत्थर पूज रहा हूँ मै भी
कबिरा खूब निहारे ।
 पागल लोग कहेगे इसको
कोई कहे बेचारे ।।
रूप बसा डभके का नैना
मन देकर घबराये ।
हरदम प्रेमी ही रोया है
कौन इसे समझाये ।।
यह तो मौन देखता रहता
सुधा देख ललचाये ।
जीवन ही कैवल्य मिलेगा
उससे नेह लगाये ।।
अनबूझी बन गयी  पहेली
देख जिया चकराये ।
जितना जाता यह करीब है
हाय-हाय दुबराये ।।
पत्थराई पत्थर संग रहते
संगति असर दिखाई ।
पत्थर प्रेम कहाँ सह सकता
वह तो सहे निहाई ।।
डा दीनानाथ मिश्र

   17
4 Comments

Gunjan Kamal

25-Mar-2023 08:33 AM

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति 👌🙏🏻

Reply

कमाल 👌👌

Reply